इसका प्रथम अंक मोबी डिक था जो कि अप्रैल 1987 में 4.00 रुपये के प्रारंभिक मूल्य से शुरू हुआ था. तीसरे अंक माकबेथ के साथ इसका मूल्य कम कर 3.00 रुपये कर दिया गया था.
प्रकाशन के द्वारा जारी किये गए विज्ञापन में वैसे तो इनके अंक हिंदी, अंग्रेजी, तमिल और मलयालम में प्रकाशित होने का उल्लेख है परन्तु मुझे अभी तक हिंदी संस्करण के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पायी है.
जहाँ तक चित्रकथा की बात है तो PAICO Classics केवल विश्व प्रसिद्ध अमर साहित्यिक कृतियों को चित्रकथा के फॉर्मेट में बहुत ही सुन्दर तरीके से प्रस्तुत करता था. विश्व प्रसिद्ध इन कहानियों के तथा उनके रचनाकार के बारे में विस्तृत और समर्पित पृष्ठ कथा सुने होने के पहले ही पाठकों को अपने रंग में रंग लेते हैं. वैसे ये चित्रकथाएं श्वेत-श्याम यानी ब्लैक एंड वाइट या फिर केवल सिंगल कलर में होती थीं यानि रंगीन चित्रकथाएं PAICO का हिस्सा नहीं थीं.
1987 में शुरू हुआ सफ़र प्रति माह एक महान कहानी के प्रस्तुतीकरण के साथ नियमित आया जरूर पर जल्द ही प्रकाशन बंद कर दिया गया. पुनः 2021 में नए ढंग और नए आवरण के साथ इनका पुनः प्रकाशन शुरू किया गया है परन्तु अनियमित रूप से ही ये प्रकाशित हो रहे हैं और शायद विगत दो वर्षों से नए अंक भी नहीं आये हैं.
एक ध्यान देनी वाली बात यह भी है कि मैंने इनके 3 अलग-अलग आवरण यानि कवर्स देखे हैं जो समय-समय पर रीप्रिंट ही हैं. अन्दर के पृष्ठ अपने मूल स्वरुप में ही रखे गए हैं.
शुरूआती प्रस्तुति में मुझे कुल 17 प्रकाशित अंको के कवर्स प्राप्त हुए हैं. बात में नए टाइटल और कहानियाँ जुडती गयी हैं जिनसे सीरियल नंबर मूल प्रकाशित अंकों से भिन्न हैं.
PAICO Classics के प्रथम पारी के अंक और उनके आवरण







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